शिक्षा मंत्री ने कहा है कि बच्चे चाहते हैं कि बगैर परीक्षा दिए अच्छे अंकों से पास हो जाएं। यह हमारे लिए बहुत मुश्किल है....

सीकर।

कोरोना के दौर में सेहत का हवाला देते हुए बोर्ड परीक्षा रद्द करने वाली सरकार में शिक्षा मंत्री ने इसका ठीकरा बच्चों पर ही फोड़ दिया। शिक्षा मंत्री ने कहा है कि बच्चे चाहते हैं कि बगैर परीक्षा दिए अच्छे अंकों से पास हो जाएं। यह हमारे लिए बहुत मुश्किल है। शिक्षा मंत्री ने कहा है कि विशेषज्ञों की कमेटी सलाह के बाद ही कुछ फैसला लिया जाएगा। दरअसल, सीकर कलेक्ट्रेट में शिक्षामंत्री गोविंद सिंह डोटासरा सालासर बालाजी के मंदिर पुजारी परिवार की ओर से 23 लाख रुपए की लागत से तीन एंबुलेंस भेंट करने के कार्यक्रम के लिए पहुंचे थे। इस मौके पर वह मौजूद डॉक्टर्स और प्रशासन के अधिकारियों से मुखातिब थे।

कोरोना की आने वाली लहर बच्चों के लिए घातक

डोटासरा ने कहा कि आने वाली लहर बच्चों के लिए घातक हो सकती है। इस आशंका के चलते सरकार चाहती है कि बच्चों का पढ़ाई का नुकसान भी नहीं हो और वे संक्रमण से भी बच जाएं। इसके लिए सरकार प्रयास कर​ रही है। ऑनलाइन सेशन फिर से शुरू करेंगे। इससे पहले भी कोरोनाकाल में स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई कराई गई थी।

अधिकतर माता-पिता भी स्कूल भेजना नहीं चाहते

डोटासरा ने कहा कि अधिकतर पैरेंट्स बच्चों को स्कूल भेजना ही नहीं चाहते। सरकार ने 25% टीचर्स को स्कूलों में बुलाना शुरू कर दिया है। वहीं 25 फीसदी शिक्षकों को बुक्स तैयार कराने में लगा रखा है। बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाने के लिए एक सोशल प्लेटफॉर्म यूट्यूब पर चैनल बनाया है। बच्चों पढ़ाने और समझाने में ऑनलाइन में अच्छे टीचर्स से सब्जैक्ट के वीडियो बनवाकर उसमें अपलोड करते हैं।

डोटासरा ने जानकारी दी है कि विशेषज्ञ शिक्षकों की एक कमेटी बनाई है जो कुछ दिनों में हमें सलाह देगी कि बच्चों को किस तरह से मार्किंग देनी होगी। 10वी और 12वीं और दूसरे क्लास के बच्चे हैं। उनको कैसे मार्किंग करनी पड़ेगी? ये हमारे लिए तलवार की धार पर नाचने जैसा टिपिकल काम है। क्योंकि हर बच्चा ये चाहता है कि कोरोना से बचे और परीक्षा नहीं दे। जबकि अच्छे अंकों से पास भी होना चाहते हैं।

शिक्षामंत्री ने कहा कि कई बच्चे अच्छे काम कर रहे हैं। कोई विदेश जाना चाहता, कोई एयरपोर्ट पर भर्ती होना चाहता है। कोई नीट देना चाहता है और जेईई देना चाहता है। कई ऐसे बच्चे है तो पढ़ने के लिए विदेश जाना चाहते हैं। लेकिन उनके 90 फीसदी से कम नंबर आए तो एडमिशन नहीं होगा। डोटासरा ने कहा कि हमारे लिए यही सबसे बड़ा टफ काम है कि सभी को खुश भी रखा जाए और उनकी प्रतिभा के साथ न्याय हो।